Essay on child labour in hindi. Essay on Child Labour in Hindi 2023-01-04

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बाल मजदूरी एक ऐसा समस्या है जो हमारे समाज में अभी भी है। यह एक ऐसा अपमान है जो हमारे समाज में बच्चों को संभवतः अपने अधिकारों से निकालता है और उन्हें सामाजिक, शासनिक और आर्थिक अधिकारों से वंचित बनाता है। यह एक ऐसा समस्या है जो हमारे समाज में बहुत ही अधिक है और जो हमारे समाज में बहुत ही अधिकारों से वंचित बनाता है।

बाल मजदूरी एक ऐसा समस्या है जो हमारे समाज में बहुत ही अधिक है और जो हमारे समाज में बहुत ही अधिकारों से वंचित बनाता है। यह एक ऐसा समस्या है जो हमारे समाज में बहुत ही अधिक है और जो हमारे समाज में बहुत ही

Essay on child labour in hindi: बाल श्रम पर निबंध

essay on child labour in hindi

बालश्रमएकप्रकारकाअपराधहैजिसमेंबच्चोंकोबहुतकमउम्रमेंकामकरनेकेलिएमजबूरकियाजाताहैऔरआर्थिकगतिविधियोंमेंभागलेकरवयस्कोंकीतरहजिम्मेदारियांनिभाईजातीहैं।अंतर्राष्ट्रीयश्रमसंगठन ILO केअनुसार, बच्चोंकेलिएलागूआयुसीमाहैकिपंद्रहवर्षकीआयुतककेबच्चेकिसीभीप्रकारकेकार्यमेंशामिलनहींहोंगे। यहकिसीभीप्रकारकेकाममेंबच्चोंकाएकरोजगारहैजोबच्चोंकोबचपन, उचितशिक्षा, शारीरिक, मानसिकऔरसामाजिककल्याणसेवंचितकरताहै।यहकुछदेशोंमेंपूरीतरहसेनिषिद्धहै, लेकिनअधिकांशदेशोंमेंयहएकअंतरराष्ट्रीयचिंताकाविषयहैक्योंकियहबच्चोंकेभविष्यकोकाफीहदतकनष्टकररहाहै। अधिकांशविकासशीलदेशोंमेंयहएकगंभीरमामलाहै एकबड़ीसामाजिकसमस्या ।छोटेआयुवर्गकेबच्चोंकोउच्चस्थितिकेलोगोंद्वाराबेहदश्रममेंशामिलकियाजारहाहै।वेइसतथ्यसेबचरहेहैंकिबच्चेराष्ट्रकीबड़ीआशाऔरभविष्यहैं। हमारेदेशमेंलाखोंबच्चेबचपनऔरउचितशिक्षासेवंचितहैंजोएकखतरनाकसंकेतहै।ऐसेबच्चोंकोस्वस्थजीवनजीनेकामौकानहींमिलताक्योंकिवेबचपनसेहीशारीरिक, मानसिकऔरसामाजिकरूपसेसंतुष्टनहींहोतेहैं। भारतीयकानूनकेअनुसार, 14 वर्षसेकमउम्रकेबच्चोंकोकिसीभीप्रकारकेकामकेलिएबाध्यनहींकियाजासकताहै, चाहेवहमाता-पितायामालिकद्वाराकारखानों, कार्यालयोंयारेस्तरांमेंकियाजाए।यहभारतकेसाथ-साथअन्यविकासशीलदेशोंमेंएकछोटेपैमानेकेउद्योग, घरेलूसहायता, रेस्तरांसेवा, पत्थरतोड़ने, दुकानदारकेसहायक, हरघरमेंरहनेवालेउद्योग, बुकबाइंडिंग, आदिमेंएकआमबातहै। बालश्रमकेकारणक्याहैं? Reason of Child Labour गरीबी ही इस बाल-मजदूरी का सबसे बड़ा कारण है । परिस्तिथि से उत्पन्न कई कारण इसको बढ़ावा देते है जैसे- कम उम्र में ही किसी अभिभावक की म्रत्यु हो जाना या फिर उनके पास रोजगार के स्थायी साधन न होना और अधिक पारिवारिक सदस्यों की संख्या होना आदि। इन सब परिस्थियों से मजबूर होकर इन बालको को उम्र और शरीर का सामर्थ्य नहीं होने पर भी अनावश्यक रूप में किसी चाय की दुकान, होटल या ढाबा, फैक्ट्री और कई प्रकार के रसायन युक्त कारखानों में काम करना पड़ता है। उस जी-तोड़ मेहनत के बाद इन्हें नाम मात्र का वेतन मिलता है जो उचित रूप से इनकी मेहनत का परिणाम भी नहीं होता है । कई मामलो में तो इनकी शरुआत सिर्फ दो वक़्त के खाने के बदले ही होती है। भारत में बाल मजदूरी Child Labour in India आज़ादी मिलने के बाद से ही भारत जैसे विकाशशील देश में भी बाल-श्रम जैसी समस्या ने अपने पैर-पसारे है । देश के महानगरो से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक यह मुख्य और गौण रूप में विद्यमान है। कश्मीर में होने वाले कालीन के उद्योग से लेकर दक्षिण भारत के माचिस और पठाखा उद्योग या महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल का बीडी उद्योग तो मुख्य रूप से बाल मजदूरी से ही विकसित हुआ है और आज भी इनके श्रम पर ही अनवरत जारी है। इनके अलावा भी कई नगरो और कस्बो में बाल-मजदूरी के द्र्श्य सामान्यतया देखने को मिल ही जाते है । बाल मजदूरी न किसी स्वतंत्र देश के लिए बल्कि यह तो सारे विश्व की मानवता के लिए एक तरह का अभिशाप ही है। बाल मजदूरी का असर Effect of Child Labour कम उम्र के सुकुमार बच्चो से जब बारह से चौदह घंटे काम लिया जाता है तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास रूक जाता है और उनका कोमल मस्तिषक पूरी तरह विकसित नहीं हो पता। उन्हें जीवन जीने के किये लिए आवश्यक आत्मविश्वास, विवेक, संयम आदि मूल्यों की परख ही नहीं रह जाती । बीमार होने पर भी लगातार काम करने से वो बीमारियाँ भयंकर रूप ले लेती है। छुट्टी नहीं मिलने या तनख्वाह काटने के डर से ये रोगी की स्तिथि में भी काम करते रहते है । कई मालिक तो दुगना वेतन भी काट लेते है । हलवाई की दूकान पर काम करने वाले कई बच्चो को तो बचा हुआ माल या फिर उसकी झुटन खाकर ही काम चलाना पड़ता है। चाय की दूकान पर कप या गिलास टूटने पर इन्हें गालिया कई बार तो लात-घुसे भी खाने पड़ते है और ऐसी ही कई अन्य यातनाये झेलनी पड़ती है । कोई वस्तु खो जाने पर चोरी का इल्जाम या वेतन से भरपाई की जाती है। सर्दी-गर्मी के अनुसार इनके बिस्तर की ,सोने की व्यवस्था भी ठीक से नहीं हो पाती है । इस प्रकार अत्यंत ही दयनीय और यातना से ग्रस्त इनका जीवन स्तर हो जाता है। बाल मजदूरी की शुरुआत Birth of Child Labour बाल मजदूरी कहा से पैदा हुई इस पर गहराई से विचार करे तो सीधा सा एक ही कारण हमें पता लगता है की गरीब-परिवार या झुग्गी झोपडी में रहने वाले बालक जिनके अभिभावकों का उन्हें पता नही या फिर बचपन में बिछुड़ गए हो या फिर वे जीवित ही नहीं हो। इन लोगो को पढने —लिखने का अवसर मिल नहीं पता और गुमराह होकर ये जिन्दा रहने की मजबूरी से बाल-मजदूरी करने को विवश हो जाते है। काम से चोरी, सोतैले माँ या पिता का बुरा व्यवहार या पढाई में मन नहीं लगने की वजह से घर छोड़ देना आदि भी इसके अन्य कारण है। देश का भविष्य कहलाने वाले बच्चो से हम बाल मजदूरी कराये ये कही से भी मानवीयता को शोभा नहीं देता है । इसके लिए हमे सबसे पहले अपने घरो का माहौल सुधारना होगा जिससे वह स्थान बच्चो को रहने के अनुकूल लगे। ऐसी परिस्तिथिया बनानी पड़ेंगी ताकि वह स्वयं को सुरक्षित महसूस करे । इनके अलावा सरकार को भी कई प्रकार की बाल-कल्याणकारी योजनाओं के द्वारा इन गुमराह और शोषित बच्चो को इनके जीवन-स्तर को सुधरने के व्यापक स्तर पर प्रयास करने होंगे तभी बाल-श्रम की इस घोर समस्या का स्थायी समाधान मिल सकता है। यह भी पढ़ें:. वह असल में बाल मजदूरी का शिकार है. बाल मजदूरी पर निबंध बाल श्रम - बाल मजदूरी एक अभिशाप निबंध, Child Labour Meaning in Hindi, Child Labour in India in Hindi, Child Labour Essay In Hindi Language 150, 200, 300, 500, 1000 words For Class 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 Students. इसलिए हमें आज ही बाल श्रम के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और जहां पर भी कोई बच्चा हमें बाल मजदूरी करते हुए मिले उसकी शिकायत हमें नजदीकी पुलिस स्टेशन में करनी चाहिए. बाल श्रम क्या है — भारत के सविधान 1950 के 24 वे अनुच्छेद के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मजदूरी, कारखानों, होटलों, ढाबों, घरेलू नौकर इत्यादि के रूप में कार्य करवाना बाल श्रम के अंतर्गत आता है अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता पाया जाता है तो उसके लिए उचित दंड का प्रावधान है.

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बाल मज़दूरी पर निबंध Essay on Child Labour in Hindi

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बाल मजदूरी को जड़ से उखाड़ फेंकना हमारे देश के लिए आज एक चुनौती बन चुका है क्योंकि बच्चों के माता-पिता ही आज बच्चों से बचपन में कार्य करवाने लगे है. इसी के कारण काफी बड़े हो जाते है और बड़े होने पर गलत कार्यों में लिप्त हो जाते है. Long Child Labour Essay in Hindi language. लोगों में और खासतौर से माँ-बाप में इस बात की जागरूकता बाधाएं की कैसे बचपन में बच्चों की शिक्षा जरूरी और अनिवार्य है । 3. स्वयं विचार कीजिए और अपने देश को बचाइये । Baal Mazdoori Par Nibandh Slogans on Child Labour in Hindi.

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Essay on Child Labour in India in Hindi

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Child Labour Essay in Hindi was asked in different classes starting from 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 and 12. इसलिए जब तक लोग जागरुक नहीं होंगे तब तक ऐसे ही बच्चे मजदूरी करते रहेंगे. अगर हमें नए भारत का निर्माण करना है तो बाल मजदूरी को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा यह सिर्फ हमारे और सरकार के सहयोग से ही संभव है. हम रोज हर चौराहे हर मोड़ पर बच्चों को कार्य करते हुए देखते हैं लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं जिसके कारण बाल मजदूरी को बढ़ावा मिलता है. यह भी पढ़ें — हम आशा करते है कि हमारे द्वारा Essay on Child Labour in Hindi पर लिखा गया निबंध आपको पसंद आया होगा। अगर यह लेख आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर करना ना भूले। इसके बारे में अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं।.

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Essay on Child Labour in Hindi, बाल मज़दूरी पर निबंध

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In this article, we are providing an Essay on Child Labour in Hindi. बालश्रम पर निबंध Essay On Child Labour In Hindi : भूमिका : बालश्रम बच्चों के द्वारा अपने बाल्यकाल में किया गया श्रम या काम है जिसके बदले उन्हें मजदूरी दी जाती है। बालश्रम भारत के साथ-साथ सभी देशों में गैर कानूनी है। बालश्रम एक कलंक होता है। बालश्रम एक अभिशाप है जिसने अपना जाल पूरे देश में बिछा दिया है कि प्रशासन की लाखों कोशिशों के बाद भी यह अपना प्रचंड रूप लेने में सफलता प्राप्त कर रहा है। बालश्रम हमारे समाज के लिए एक कलंक बन चुका है। बालश्रम : किसी भी बच्चे के बाल्यकाल के दौरान पैसों या अन्य किसी भी लोभ के बदले में करवाया गया किसी भी तरह के काम को बालश्रम कहा जाता है। इस प्रकार की मजदूरी पर अधिकतर पैसों या जरूरतों के बदले काम किया जाता है। बालश्रम पूर्ण रूप से गैर कानूनी है। इस प्रकार की मजदूरी को समाज में हर वर्ग द्वारा निंदित भी किया जाता है। अगर सामान्य शब्दों में समझा जाए तो बच्चे जो 14 वर्ष से कम आयु के होते हैं उनसे उनका बचपन, खेल-कूद, शिक्षा का अधिकार छीनकर उन्हें काम में लगाकर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित कर कम रुपयों में काम करा कर शोषण करके उनके बचपन को श्रमिक रूप में बदल देना ही बालश्रम कहलाता है। बालश्रम के कारण : आज के समय में बालश्रम पूरे देश में फैल चुका है। हमारे समाज के लिए बालश्रम एक अभिशाप बन चुका है। सरकार द्वारा चलाए गए नियमों के बाद भी गंदी आदत समाज से कभी छूटती ही नहीं है। भारत देश की ज्यादातर आबादी गरीबी से पीड़ित है। कुछ परिवारों के लिए भर पेट खाना खाना भी एक सपना सा लगता है। गरीबी से पीड़ित लोग बहुत बार अपनों को खोने के गम से अवगत हो चुके हैं। गरीबी की वजह से गरीब माता-पिता अपने बच्चों को घर-घर और दुकानों में काम करने के लिए भेजते हैं। लेकिन कभी-कभी ऐसे निर्णय बच्चों की शारीरिक और मानसिक अवस्था को झंझोर कर रख देते हैं। इस निर्णय को अपने परिवार के पेट पालने के उद्देश्य से लिया जाता है। दुकान और छोटे व्यापारी बच्चों से काम बड़ों जितना करवाते हैं लेकिन उन्हें कीमत आधी देते हैं क्योंकि वो बच्चे होते हैं। बच्चे अधिक चालाक नहीं होते हैं इसलिए उन्हें ज्यादा चोरी और ठग का अवसर नहीं मिलता है। व्यापार में उत्पादन लागत कम लगने की वजह से भी कुछ व्यापारी बच्चों की जिंदगी बर्बाद कर देते हैं। बच्चे बिना किसी भी लोभ के मन लगाकर काम करते हैं। हमारे देश की आजादी के बाद भी बहुत से इलाके ऐसे हैं जहाँ के बच्चे आज तक शिक्षा जैसे मौलिक अधिकार से वंचित हैं। हमारे देश में हजारों गाँव हैं जहाँ पर पढाई की कोई अच्छी व्यवस्था नहीं है लेकिन अगर व्यवस्था है तो कोशों दूर है। इस तरह का प्रशासनिक ढीलापन भी बालश्रम के लिए जिम्मेदार है। इन सब से ज्यादा पीड़ित गरीब परिवार होते हैं क्योंकि उनके बच्चों के लिए पढना एक सपना होता है। बच्चों के लिए किफायती स्कूलों की कमी की वजह से बच्चों को अनपढ़ और बेबस रहना पड़ता है। बच्चों द्वारा अनपढ़ और बेबस रहना उन्हें मानसिक रूप से कई बार छू जाता है। बहुत बार बच्चे पढाई के बिना जीवन जीने के लिए मजबूर हो जाते हैं और कभी-कभी ये मजबूरियां उन्हें बालश्रम की खाई में धकेल देती हैं जिससे आज तक किसी का भी भला नहीं हुआ है न ही कभी होगा। बहुत से परिवारों में बालश्रम को परंपरा और रीती का नाम देकर इसको बड़ी आसानी से अंजाम दिया जाता है। बहुत से परिवारों का मानना होता है कि उनके जीवन में कभी अच्छी जिंदगी लिखी ही नहीं है और वर्षों से चली आ रही मजदूरी की परंपरा ही उनका कमाई और जीवन व्यतीत करने का एक श्रोत होता है। बहुत से परिवारों का तो यह भी मानना होता है कि बाल्यकाल से काम करने से बच्चे आने वाले समय में ज्यादा मेहनती और दुनियादार हो जाएंगे। बालश्रम बच्चों के निजी विकास को जन्म देता है जो आगे जिंदगी जीने में आसान होता है। हमारे समाज को लगता है कि लडकियाँ लडकों से कमजोर होती हैं उनकी लडकों से समानता नहीं की जा सकती है। इसी वजह से उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है। बालश्रम के परिणाम : एक बच्चे को 1000-1500 रूपए देकर मजदूरी करवाने से कई प्रकार की हानि होती है। इसका परिणाम यह होता है कि बच्चा अशिक्षित रह जाता है। देश का आने वाला कल अंधकार की ओर जाने लगता है। इसके साथ ही बेरोजगारी और गरीबी और अधिक बढ़ने लगती है। अगर देश का आने वाला कल इतना बुरा होगा तो इसमें सभी का नुकसान होगा। जिस उम्र में बच्चों को सही शिक्षा मिलनी चाहिए, खेल कूद के माध्यम से अपने मस्तिष्क का विकास करना चाहिए उस उम्र में बच्चों से काम करवाने से बच्चों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास रुक जाता है। शिक्षा का अधिकार मूल अधिकार होता है। शिक्षा से किसी भी बच्चे को वंचित रखना अपराध माना जाता है। बच्चों का कारखाने में काम करना सुरक्षित नहीं होता है। गरीबी में थोड़े से पैसों के लिए अपनी जान को खतरे में डालना या पूरी उम्र उस बीमारी से घिरे रहने जो लाइलाज हो। इसलिए किसी भी बच्चे के लिए बालश्रम बहुत अधिक खतरनाक होता है। अगर कोई बच्चा गरीबी या मजबूरी से परिश्रम कर रहा है तो उसका पर्याप्त वेतन नहीं दिया जाता है और हर प्रकार से उसका शोषण किया जाता है जो बहुत ही गंभीर अपराध है। बालश्रम रोकने के उपाय : बालश्रम हमारे समाज के लिए एक अभिशाप है जो हमारे समाज को अन्याय मुक्त नहीं बनने देगा। हमें बालश्रम का अंत करने के लिए सबसे पहले अपने घरों या दफ्तरों में किसी भी बच्चे को काम पर नहीं रखना चाहिए। हमें हमेशा इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि बच्चे से काम करवाने के बदले उसे पैसे देकर या खाना देकर हम उन पर कोई एहसान नहीं करते हैं बल्कि हम उसके भविष्य से खेलते हैं। बालश्रम को खत्म करने के लिए सबसे पहले हमें अपनी सोच को बदलना होगा। बालश्रम को रोकने के लिए मजबूत और कड़े कानून बनाने चाहिएँ जिससे कोई भी बाल मजदूरी करवाने से डरें। अगर आपके सामने कोई भी बालश्रम का मामला आए तो सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में खबर करनी चाहिए। हमें बालश्रम को पनाह देने वाले पत्थर दिलों के विरुद्ध अपनी आवाज को बुलंद करना चाहिए। आम आदमी को भी बाल मजदूरी के विषय में जागरूक होना चाहिए और अपने समाज में इसे होने से रोकना चाहिए। गरीब माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा की ओर पूरा ध्यान देना चाहिए क्योंकि आज सरकार मुफ्त शिक्षा, खाना और कुछ स्कूलों में दवाईयां जैसी चीजों की सुविधाएँ प्रदान कर रही है। कारखानों और दुकानों के लोगों को प्रण लेना चाहिए कि वो किसी भी बच्चे से मजदूरी या श्रम नहीं करवाएंगे और काम करवाने वाले लोगों को रोकेंगे। अक्सर हम लोग बाजार जाकर अपनी जरूरत का सामान खरीद लेते हैं बिना इस बात को जाने कि इसकी बनावट के पीछे किसी बालश्रम का अभ्यास है या नहीं। ऐसा कहा जा सकता है कि इससे हमारे समाज में बदलाव लाया जा सकता है। हम जब भी कोई सामान खरीदें तो पहले दुकानदार से उसकी तकनीक के बारे में जरुर पूंछें। हम इस प्रश्न को पूंछ कर समाज में सचेतना का एक माहौल पैदा कर सकते हैं। हमें बालश्रम की बनायीं गई किसी भी चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर हमें किसी भी बालश्रम का पता चले उसके बारे में सबसे पहले बच्चे के परिवार वालों से बात करनी चाहिए। उनके हालातों को समझकर उनके बच्चे के भविष्य के बारे में उन्हें बताना चाहिए। बच्चों के परिवार वालों को बालश्रम के नुकसान और कानूनी जुर्म के बारे में बताना चाहिए। उपसंहार : बालश्रम को खत्म करना केवल सरकार का ही कर्तव्य नहीं है हमारा भी कर्तव्य है कि हम इस योजना में सरकार का पूरा साथ दें। सरकार इस योजना को सफल बनाने के लिए बहुत प्रयास कर रही है। बालश्रम एक बहुत बड़ी सामाजिक समस्या है। इस समस्या को सभी के द्वारा जल्द-से-जल्द खत्म करने की जरूरत है। बच्चे बहुत कम हैं लेकिन वे भविष्य के विकासशील देश का भविष्य हैं।. By Aug 3, 2019 बालश्रमबच्चोंकोआर्थिकगतिविधियोंजैसेशोषणकारीउद्योग, अवैधव्यापार, आदिमेंअंशकालिकयापूर्णकालिकआधारपरनियोजितऔरसंलग्नकरनेकाकार्यहै। बालश्रमपरनिबंध, short essay on child labour in hindi 100 शब्द बालश्रमबच्चोंद्वाराउनकेबचपनमेंकिसीभीकार्यक्षेत्रमेंदीजानेवालीसेवाहै।यहजीवननिर्वाहकेलिएसंसाधनोंकीकमी, माता-पिताकीगैरजिम्मेदारीयास्वामीद्वाराजबरदस्तीकमनिवेशपरअपनारिटर्नबढ़ानेकेलिएसंसाधनोंकीकमीकेकारणकियाजाताहै। यहबालश्रमकेकारणसेकोईफर्कनहींपड़ताक्योंकिसभीकारणबच्चोंकोबचपनकेबिनाजीवनजीनेकेलिएमजबूरकरतेहैं।बचपनहरकिसीकेजीवनकीमहानऔरसबसेखुशीकीअवधिहोतीहै, जिसकेदौरानकोईव्यक्तिमाता-पिता, प्रियजनोंऔरप्रकृतिसेजीवनकीमूलरणनीतिकेबारेमेंसीखताहै।बालश्रममानसिक, शारीरिक, सामाजिकऔरबौद्धिकरूपसेसभीपहलुओंमेंबच्चोंकीउचितवृद्धिऔरविकासमेंहस्तक्षेपकरताहै। बालश्रमपरनिबंध, 150 शब्द: बालश्रमबच्चोंद्वाराकिसीभीकार्यक्षेत्रमेंलियागयापूर्णकार्यहै।यहमाता-पिता, बुरीघटनाओंयामालिकोंद्वाराएकजबरदस्तीकरवायाजानेवालाकार्यहै।बचपनसभीकेजन्मकाअधिकारहै, जिसेवहअपनेमाता-पिताकेप्यारऔरदेखभालकेतहतरहनाचाहिएलेकिनबालश्रमकायहगैरकानूनीकार्यएकबच्चेकोबड़ेकीतरहजीवनजीनेकेलिएमजबूरकरताहै। यहबच्चेकेजीवनमेंकईमहत्वपूर्णचीजोंकीकमीकाकारणबनताहैजैसेअनुचितशारीरिकविकासऔरविकास, मनकाअनुचितविकास, सामाजिकऔरबौद्धिकरूपसेअस्वस्थ।बालश्रमएकबच्चेकोबचपनकेसभीलाभोंसेदूररखताहै, सभीकेजीवनकासबसेसुखदऔरयादगारकालकामकरनेमेंबीतजाताहै। यहनियमितस्कूलमेंभागलेनेकीक्षमताकेसाथहस्तक्षेपकरताहैजोउन्हेंदेशकेसामाजिकरूपसेखतरनाकऔरहानिकारकनागरिकबनाताहै।बालश्रमकीयहअवैधगतिविधिसरकारद्वाराबालश्रमकेअधिनियमकोपूरीतरहसेप्रतिबंधितकरनेकेलिएकईनियमोंऔरविनियमोंकेबादभीदिन-प्रतिदिनबढ़तीजारहीहै। बालश्रमपरनिबंध, 200 शब्द: भारतमेंबालश्रमएकसबसेबड़ासामाजिकमुद्दाबनगयाहैजिसेनियमितआधारपरहलकरनेकीआवश्यकताहै।यहकेवलसरकारकीजिम्मेदारीनहींहै, इसेसभीमाता-पिता, मालिकोंऔरअन्यसामाजिकसंगठनोंद्वाराहलकियाजानाचाहिएऔरदेखभालकीजानीचाहिए। यहसभीकामुद्दाहैजिसेव्यक्तिगतरूपसेहलकियाजानाचाहिएक्योंकियहकिसीभीव्यक्तिकेबच्चेकेसाथहोसकताहै।कईविकासशीलदेशोंमेंउच्चस्तरकीगरीबीऔरबच्चोंकेलिएस्कूलीशिक्षाकेअवसरोंकेअस्तित्वकेकारणबालश्रमबहुतआमहै। बालश्रमकीउच्चतमघटनादरअभीभी 50 प्रतिशतसेअधिकहैजिसमेंविकासशीलदेशमें 5 से 14 आयुवर्गकेबच्चेकामकररहेहैं।कृषिक्षेत्रमेंबालश्रमकीदरअधिकहै, जोज्यादातरग्रामीणऔरअनौपचारिकशहरीअर्थव्यवस्थामेंपायाजाताहै, जहांज्यादातरबच्चोंकोमुख्यरूपसेउनकेखुदकेमाता-पिताद्वाराबजायउन्हेंस्कूलभेजनेकेऔरउन्हेंखेलनेकेलिएमुक्तकरनेकेलिएदोस्तोंकेसाथकेबजायकृषिकार्यमेंलगायाजाताहै। बालश्रमकामुद्दाअबएकअंतरराष्ट्रीयचिंताकाविषयहैक्योंकियहदेशकेविकासऔरविकासकोबाधितकरनेमेंअत्यधिकशामिलहै।स्वस्थबच्चेकिसीभीदेशकाउज्ज्वलभविष्यऔरशक्तिहोतेहैंऔरइसप्रकारबालश्रमबच्चोंकेभविष्यकोनुकसानपहुंचाताहै, बिगाड़ताहैऔरनष्टकरताहैऔरआखिरकारदेश। बालश्रमपरनिबंध, Essay on child labour in hindi 250 शब्द बालश्रममानवताकाअपराधहैजोसमाजकेलिएएकअभिशापबनगयाहैऔरदेशकेविकासऔरविकासकोरोकनेवालेबड़ेमुद्देहैं।बचपनजीवनकासबसेयादगारदौरहैजिसेहरकिसीकोजन्मसेजीनेकाअधिकारहै।बच्चोंकोदोस्तोंकेसाथखेलने, स्कूलजाने, माता-पिताकेप्यारऔरदेखभालकोमहसूसकरनेऔरप्रकृतिकीसुंदरताकोछूनेकापूराअधिकारहै। हालांकि, सिर्फलोगों माता-पिता, मालिकों, आदि कीअनुचितसमझकेकारण, बच्चेबड़ेजीवनजीनेकेलिएमजबूरहैं।उन्हेंबचपनमेंजीवनरक्षाकेलिएसभीसंसाधनोंकीव्यवस्थाकरनेकेलिएमजबूरकियाजाताहै।माता-पिताअपनेबच्चोंकेशुरुआतीबचपनमेंउन्हेंअपनेपरिवारकेप्रतिबहुतजिम्मेदारबनानाचाहतेहैं। वेयहनहींसमझतेकिउनकेबच्चोंकोप्यारऔरदेखभालकीआवश्यकताहै, उन्हेंउचितस्कूलीशिक्षाकीआवश्यकताहैऔरदोस्तोंकेसाथठीकसेबढ़नेकेलिएखेलें।ऐसेमाता-पितासमझतेहैंकिउनकेबच्चेउनकीएकमात्रसंपत्तिहैं, वेउनकाउपयोगकरसकतेहैंजैसावेचाहतेहैं। लेकिनवास्तवमें, हरमाता-पिताकोयहसमझनेकीजरूरतहैकिउनकेदेशकेप्रतिभीउनकीकुछजिम्मेदारीहै।उन्हेंदेशकेभविष्यकोउज्ज्वलबनानेकेलिएअपनेबच्चोंकोहरपहलूमेंस्वस्थबनानेकीआवश्यकताहै। माता-पिताकोपरिवारकीसारीज़िम्मेदारीखुदलेनीचाहिएऔरअपनेबच्चोंकोबहुतप्यारऔरदेखभालकेसाथअपनेबचपनकोजीनेदेनाचाहिए।दुनियाभरमेंबालश्रमकेमुख्यकारणगरीबी, माता-पिता, समाज, कमवेतन, बेरोजगारी, खराबजीवनस्तरऔरसमझ, सामाजिकअन्याय, स्कूलोंकीकमी, पिछड़ापन, अप्रभावीकानूनहैंजोदेशकेविकासकोसीधेप्रभावितकररहेहैं। बालश्रमपरनिबंध, 300 शब्द: बालश्रममेंपांचसेचौदहसालकीउम्रमेंबच्चोंकेनियमितरूपसेकामकरनाशामिलहै।कईविकासशीलदेशोंकेबच्चोंकोअपनेअस्तित्वकेलिएबहुतकमवेतनपरअपनीइच्छाकेखिलाफपूरेदिनकड़ीमेहनतकरनेकेलिएमजबूरकियाजाताहै। वेस्कूलजानाचाहतेहैं, अपनेदोस्तोंकेसाथखेलनाचाहतेहैंऔरअपनेमाता-पिताद्वाराअमीरघरोंमेंरहनेवालेअन्यबच्चोंकीतरहप्यारऔरदेखभालचाहतेहै।लेकिनदुर्भाग्यसे, उन्हेंअपनीइच्छाकेविरुद्धकुछकरनेकेलिएमजबूरकियाजाताहै। विकासशीलदेशोंमें, गरीबीकेकारणबालश्रमकीदरअधिकहै, शिक्षाकेलिएनिम्नस्तरकीजागरूकताऔरखराबस्कूलीशिक्षाकेअवसर। 5 से 14 आयुवर्गकेअधिकांशबच्चेग्रामीणक्षेत्रोंमेंअपनेमाता-पिताद्वाराकृषिमेंशामिलपाएजातेहैं।दुनियाभरमेंकिसीभीविकासशीलदेशमेंगरीबीऔरस्कूलोंकीकमीबालश्रमकेप्राथमिककारणहैं। बचपनकोसभीकेजीवनमेंसबसेसुखदऔरमहत्वपूर्णअनुभवमानाजाताहैक्योंकिबचपनहीसीखनेकासबसेमहत्वपूर्णऔरअनुकूलसमयहोताहै।बच्चोंकोअपनेमाता-पितासेउचितध्यानपाने, अपनेमाता-पितासेप्यारऔरदेखभाल, उचितस्कूलीशिक्षा, मार्गदर्शन, दोस्तोंकेसाथखेलनेऔरअन्यखुशीकेक्षणोंकापूराअधिकारहै। बालश्रमहरदिनकईकीमतीबच्चोंकेजीवनकोदूषितकररहाहै।यहउच्चस्तरकागैरकानूनीकार्यहैजिसकेलिएकिसीकोदंडितकियाजानाचाहिएलेकिनअप्रभावीनियमोंऔरविनियमोंकेकारणयहएकतरफहोरहाहै।समाजसेबालश्रमकोजल्दसेजल्दरोकनेकेलिएकुछभीकारगरनहींहोरहाहै। बच्चेबहुतछोटे, प्यारेऔरमासूमहोतेहैं, जोउन्हेंकमउम्रमेंहोनेवालीचीजोंकाएहसासकरातेहैं।वेयहपहचाननेमेंअसमर्थहैंकिउनकेलिएक्यागलतऔरगैरकानूनीहै, बजायइसकेकिवेअपनेकामकेलिएकमपैसेपाकरखुशहों।अनजानेमेंवेदैनिकआधारपरधनप्राप्तकरनेऔरअपनेपूरेजीवनऔरभविष्यकोबर्बादकरनेमेंरुचिरखतेहैं। बालश्रमपरनिबंध, Essay on child labour in hindi 400 शब्द बच्चोंकोउनकेदेशकीसबसेमहत्वपूर्णसंपत्तिकेरूपमेंसंरक्षितकियाजाताहै, लेकिनमाता-पिताकीअनुचितसमझऔरगरीबीउन्हेंदेशकीशक्तिहोनेकेबजायदेशकीकमजोरीकाकारणबनातीहै।गरीबीरेखाकेनीचेकेअधिकांशबच्चेसरकारद्वाराचलाएजारहेजागरूकताकार्यक्रमऔरबच्चेकेकल्याणकेलिएसमाजकेभविष्यकेकल्याणकेबादभीदैनिकबालश्रमकरनेकेलिएमजबूरहैं। बच्चेकिसीभीराष्ट्रकीशक्तिहैंलेकिनकुछलोगइसेलगातारख़त्मकरनेमेंलगरहेहैंऔरदेशकेभविष्यकोनष्टकररहेहैंऔरबढ़तेबच्चोंकोअवैधरूपसेशामिलकरकेछोटेपैसेकमारहेहैं।वेनिर्दोषलोगोंऔरउनकेबच्चोंकेनैतिककेसाथखेलरहेहैं। बच्चोंकोबालश्रमसेबचानादेशमेंरहनेवालेप्रत्येकनागरिककीजिम्मेदारीहै।बालश्रमसामाजिक-आर्थिकमुद्दाहैजोबहुतपहलेसेचलाआरहाहैऔरअबइसेअंतिमआधारपरहलकरनेकीआवश्यकताहै।देशकीआजादीकेबाद, बालश्रमकेसंबंधमेंविभिन्नकानूनऔरकानूनलागूकिएगएहैं, लेकिनदेशमेंइसकाअंतनहींहुआ। बालश्रमशारीरिक, मानसिक, सामाजिकऔरबौद्धिकरूपसेउनकेस्वास्थ्यकोसीधेनष्टकरकेबच्चोंकीमासूमियतकोबर्बादकरताहै।बच्चेप्रकृतिकीप्यारीरचनाहैंलेकिनयहउचितनहींहैकिकुछबुरीपरिस्थितियोंकेकारणवेअपनीउचितउम्रसेपहलेकठिनश्रमकरनेकेलिएमजबूरहोजातेहैं। बालश्रमवैश्विकमुद्दाहैजोअविकसितदेशोंमेंअधिकआमहै।गरीबीरेखाकेनीचेगरीबमाता-पितायामाता-पिताअपनेबच्चोंकीशिक्षाकाखर्चवहनकरनेमेंअसमर्थहैंऔरवेपरिवारकेअस्तित्वकेलिएपर्याप्तपैसाकमानेमेंअसमर्थहैं।इसलिए, वेअपनेबच्चोंकोस्कूलभेजनेकेबजायउनकीजरूरतोंकोपूराकरनेकेलिएकड़ीमेहनतमेंशामिलकरनाबेहतरसमझतेहैं। वेसमझतेहैंकिस्कूलीशिक्षासमयकीबर्बादीहैऔरकमउम्रमेंपैसाकमानाउनकेपरिवारकेलिएअच्छाहै।बालश्रमकेबुरेप्रभावोंकेबारेमेंगरीबलोगोंकेसाथ-साथअमीरलोगों गलततरीकेसेदेशकीसंपत्तिकाउपयोगनहींकरने केबारेमेंजागरूककरनेकीतत्कालआवश्यकताहै। उन्हेंउनसभीसंसाधनोंकालाभउठानाचाहिए, जिनकीउनकेपासकमीहै।अमीरलोगोंकोगरीबलोगोंकीमददकरनीचाहिएताकिउनकेबच्चोंकोभीबचपनमेंसभीआवश्यकचीजेंमिलसकें।सरकारकोइसकीजड़ोंकोहमेशाकेलिएपूरीतरहसेसमाप्तकरनेकेलिएकुछप्रभावीनियमोंऔरविनियमोंकीआवश्यकताहै। बालश्रमक्याहै? हमारे देश की आजादी के इतने सालों बाद भी बाल मजदूरी हमारे देश के लिए कलंक बना हुआ है हम आज भी यह बहुत ही विडंबना का विषय है कि आज की सदी के भारत में भी हम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पा रहे है. बाल श्रम पर निबंध। Now learn more about Child Labour Essay in Hindi and take examples to write Child Labour Essay in Hindi. . प्रारम्भिक शिक्षा को हर स्तर पर मुफ्त करें ताकि गरीब से गरीब बच्चा शिक्षा पा सके । 5.

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बाल मजदूरी पर निबंध

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किसी भी बच्चे के लिए बचपन में काम करना एक बहुत ही भयावह स्थिति होती है क्योंकि कभी कभी बच्चों के साथ कुछ ऐसे कृत्य हो जाते है जिससे उनकी पूरी जिंदगी तबाह हो जाती है. Essay on Child Labour in Hindi 1800 Words प्रस्तावना — बाल मजदूरी एक बच्चे के बचपन के सबसे भयावह दिन होते है. दोस्तों आज के इस टॉपिक बाल मजदूरी पर निबन्ध में हम इस गंभीर मुद्दे पर बात करेंगे जिसमे जानेंगे की कैसे हमे इस बात पर ध्यान देना चाहिए और इसे रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए बाल श्रम एक अपराध है और हमे इसे कभी भी बढ़ावा नहीं देना है और हर संभव इसे रोकना है क्योकि एक हमारे समाज के भविष्य के लिए सही नहीं है बच्चे देश का भविष्य होते है अगर वही मजदूरी करने लगे और पढाई लिखाई में ध्यान ना दे तो कैसे हमारा देश आगे बढेगा? बाल मजदूरी हमारे समाज और हमारे देश के ऊपर सबसे बड़ा कलंक है आज भले ही भारत के लोग पढ़े लिखे हैं लेकिन जब किसी बच्चे को मजदूरी करते हुए देखते है तो उसकी सहायता नहीं करते हैं सहायता करना तो दूर वे पुलिस या अन्य सरकारी संस्थाओं को इसकी जानकारी तक नहीं देते है. हमें बाल श्रम को जड़ से मिटाने के लिए कड़े कानून बनाने होंगे साथ ही स्वयं को भी जागरूक होना होगा तभी इस बाल मजदूरी के अभिशाप से छुटकारा पाया जा सकेगा. जिसके कारण उनका पूरा बचपन मसूरी काम करने में बीत जाता है. आज हमारे देश में किसी बच्चे का कठिन कार्य करते हुए देखना आम बात हो गई है.

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Essay on Child Labour in Hindi

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कुछ ऐसे संगठन बनाएं जो बाल-मजदूरी को रोकने के लिए प्रयासरत रहे । 2. लेकिन किताबी दुनिया से बाहर आकर देखे तो हमें हर दुकान हर मोड़ पर बाल मजदूरी करते हुए बच्चे देखने को मिलते है. हमें एक भारत के सच्चे नागरिक होने का कर्तव्य निभाना चाहिए जब भी आपको कोई बच्चा बाल मजदूरी करता हुआ दिखाई दे तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने मैं उसके खिलाफ शिकायत करनी चाहिए जब तक हम स्वयं जागरुक नहीं होंगे तब तक सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों कि ऐसे ही अवहेलना होती रहेगी. Slogans on Child Labour in Hindi : दोस्तों आज हमने बाल मजदूरी पर स्लोगन लिखे हैं क्योंकि हमारे भारत देश में बाल मजदूरी आज भी एक बहुत बड़ा विषय है जिसके कारण लाखों बच्चों का भविष्य बर्बाद हो जाता है इससे उन बच्चों का बचपन तो बर्बाद होता ही है साथ में हमारे देश की आर्थिक स्थिति पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है. जो भी लोग बाल-मजदूरी को बढ़ावा दें उन्हें कठोर रूप से दण्डित कर समाज में ये सन्देश दें की ये एक बहुत बड़ा अक्षम्य अपराध है । 8. हमारी भारत सरकार ने बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए कई कानून बनाए हैं लेकिन उनकी पालना नहीं होने के कारण सड़क के किनारे बने ढाबों, होटलों इत्यादि में आज भी बच्चे बाल मजदूरी कर रहे होते है लेकिन कोई भी उनकी तरफ ध्यान नहीं देता है.

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5+ बाल मजदूरी पर निबंध

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उपसंहार — बाल मजदूरी हमारे भारत देश और हमारे समाज के लिए एक अभिशाप बन चुका है अगर जल्द ही इसे खत्म नहीं किया गया तो यह हमारे देश की तरक्की में बाधक होगा साथ ही जिन बच्चों को बचपन में हंसना खेलना और पढ़ाई करना चाहिए वह बच्चे हमें अधिक मात्रा में कठिन परिश्रम करते हुए मिलेंगे जिसे हमारा देश का भविष्य खराब हो जाएगा. सभी बच्चों का मन बचपन में खिलौने से खेलने और शिक्षा प्राप्त करने का होता है लेकिन क्या करें साहब कहीं लालच तो कहीं परिवार की जिम्मेदारियां सामने आ जाती है. बाल मजदूरी को बड़े लोगों और माफियाओं ने व्यापार बना लिया है जिसके कारण दिन प्रतिदिन हमारे देश में बाल श्रम बढ़ता जा रहा है और बच्चों का बचपन खराब हो रहा है. Bal Majduri Essay in Hindi 500 Words रूपरेखा — बाल श्रम हमारे देश और समाज के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है आज समय आ गया है कि हमें इस विषय पर बात करने के साथ-साथ अपनी नैतिक जिम्मेदारियां भी समझनी होगी. उनके मालिकों के खिलाफ शिकायत करनी चाहिए लोगों को पता ही नहीं होता है कि वे जिस छोटू, मोटू को प्यार से बुला रहे है. लोगों को छोटा परिवार रखने के लिए प्रेरित करें । 6. हमारे भारत में बच्चों को भगवान स्वरूप माना जाता है लेकिन उन्हीं से उनका बचपन छीन लिया जाता है और हाथों में परिवार की जिम्मेदारियां थमा दी जाती है.

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बालश्रम पर निबंध

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बाल श्रम को रोकने के लिए सरकार द्वारा किए गए कार्य — 1 The Child Labour Prohibition and regulation Act 1986 :बाल श्रम को जड़ से खत्म करने के लिए हमारी सरकार द्वारा 1986 में चाइल्ड लेबर एक्ट बनाया गया है जिसके तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे से कार्य करवाना दंडनीय अपराध माना जाएगा. बाल श्रम रोकथाम के उपाय — 1 जागरूकता — बाल श्रम को अगर रोकना है तो हमें लोगों को जागरूक करना होगा क्योंकि जब तक लोगों में यह जागरूकता नहीं आएगी बच्चों से मजदूरी नहीं करवानी चाहिए और जो भी बच्चे मजदूरी कर रहे है. बाल मजदूरी के समाधान — 1 बाल मजदूरी को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए में कड़े कानूनों का निर्माण करना होगा साथ ही उनकी सख्ती से पालना भी करवानी होगी. अगर इसे जल्द ही रोका नहीं गया तो बच्चों के भविष्य के साथ साथ देश का भविष्य भी डूब जाएगा. जैसे जैसे देश की आबादी बढ़ती जा रही है वैसे वैसे ही बाल मजदूर भी बढ़ते ही जा रहे हैं इसे अगर जल्द ही रोका नहीं गया तो हमारे देश के लिए यह आने वाली सबसे बड़ी महामारी होगी. हमें हमारी कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना होगा तभी जाकर हम बाल श्रम जैसी भयंकर परेशानियों से निपट पाएंगे.

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Essay On Child Labour In Hindi

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बाल मजदूरी के कारण — 1 बाल मजदूरी का सबसे बड़ा कारण हमारे देश में गरीबी का होना है गरीब परिवार के लोग अपनी आजीविका चलाने में असमर्थ होते हैं इसलिए वे अपने बच्चों को बाल मजदूरी के लिए भेजते है. Essay on Child Labour in Hindi- बाल मजदूरी पर निबंध बाल श्रम Essay on Child Labour in India in Hindi 150 words बाल श्रमिक का अर्थ है- किसी बच्चे का बचपन में ही मजदूर हो जाना। बच्चे कोमल होते हैं। पढ़ना-लिखना और निश्चित खेलना उनका मौलिक अधिकार है। बचपन में उनके कंधों पर कमाई-धमाई का बोझ नहीं डालना चाहिए। ऐसा करना उनके मौलिक अधिकार पर ही कठाराघात है। भारत एक गरीब देश है। यहाँ के निवासियों में से अनेक अभागे लोग दो समय का भोजन भी नहीं जुटा पाते। इस स्थिति में बच्चों के माँ-बाप उन्हें पैदा होते ही कमाने के लिए देते हैं। यह समस्या बहुत कठिन है। यह तब तक दूर नहीं हो सकती, जब तक कि देश से गरीबी और भुखमरी दूर नहीं होती। बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना, बचपन में शिक्षा को अनिवार्य बनाना, इसके लिए देश की मानसिकता तैयार करना तथा बाल-श्रमिकों पर सख्त कदम उठाना ही कुछ कारगर उपाय हो सकते हैं। Child Labour Essay in Hindi 200 words बाल मजदुरी आज के समय की सबसे बड़ी समस्या है जिसके कारण देश का भविष्य अंधकार में हैं। बाल मजदुरी का अर्थ बच्चों से 14 साल से कम उम्र में काम करवाना है। हम बहुत सी दुकानों, सड़को, कारखानों और डाब्बों में बच्चों को काम करते हुए दिखते हैं जो कि गलत है। बाल मजदुरी के कारण बच्चों से उनका बचपन छीन जाता है। उनका सही रूप से शारूरिक और मानसिक विकास नहीं हो पाता है। उन्हें बहुत से अत्याचार और यातनाओं का सामना करना पड़ता है। कारखानों की विष युक्त वातावरण में काम करने को कारण वह बीमार पढ़ जाते हैं और उनकी कम उमर में ही मृत्यु हो जाती है। हर देश का भविष्य वहाँ के बच्चे होतें हैं और यदि वहीं स्वस्थ नहीं होगा और उनका पूर्ण विकास नहीं होगा तो देश प्रगति नहीं कर सकेगा। बाल मजदुरी को रोक हर बच्चे को उसका हक दिलाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सरकार ने कानुन बनाया है कि किसी भी कार्यस्थल पर 14 साल की उमर से छोटे बच्चे को नहीं रखा जाऐगा। यदि कोई ऐसा करता हुआ पाया जाता है तो उसे सख्त से सख्त सजा दी जाऐगी। अगर हम भी व्यक्तिगत स्तर पर किसी बच्चे को बाल मजदुरी की समस्या से पीड़ित पातो हैं तो हमें उसकी सहायता करनी चाहिए और उन्हें उनका उज्जवल भविष्य देना चाहिए। Bal Majduri Essay in Hindi in 300 words 5 से 14 साल के बच्चों के द्वारा नियमित तौर पर काम करवाना बाल मजदूरी कहलाता है। बाल मजदूरी एक गैर कानूनी कार्य है जो उनके माता-पिता या उनके मालिक के द्वारा दबाव में करवाया जाता है। विकसित देशों में बच्चों को निम्न दरों पर घोर परिश्रम करवाया जाता है । बाल मजदूरी के कारण बच्चे अपना बचपन सही तरह से नहीं जी पाते हैं और इसका परिणाम उनके भविष्य पर पड़ता है । भारत के संविधान अनुसार सभी बच्चों को अपना बचपन जीने का अधिकार है। और इस अधिकार को कोई भी नहीं छीन सकता। अगर कोई उनका यह अधिकार छीनता है तो वह भारत के संविधान के खिलाफ होगा और उन पर कार्यवाही होगी। लेकिन 2011 के सेंसस के अनुसार भारत में कुल 1 करोड़ बच्चो से बाल मजदूरी करवाई जाती है। जो किसी भी विकसित या विकासशील देशों के लिए बहुत हानिकारक है। बाल मजदूरी इन दिनों सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है और इसको हल करने के लिए सरकार पूरा प्रयास कर रही है। लेकिन यह दुश कार्य खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसका प्रभाव हमारे हमारे देश के भविष्य पे पड़ेगा । बाल मजदूरी का मुख्य कारण गरीबी और शिक्षण संस्थान की कमी है । बच्चों को गरीबी के अभाव में जीवन जीने के लिए बाल मजदूरी करनी पड़ती है तथा अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाई लिखाई की जगह कृषि कार्यों में लगा दिया जाता है। जिससे उनकी पढ़ाई को काफी नुकसान होता है। हम सब मिलकर इस बाल मजदूरी को रोक सकते है। यदि सरकार, ग्रामीण तथा अन्य विकसित क्षेत्रों में शिक्षण संस्थान को बढ़ावा दें तो बच्चे पढ़ सकेंगे और अपना भविष्य बना सकेंगे। और धीरे-धीरे बाल मजदूरी कम होती जाएगी और एक समय ऐसा आएगा कि बाल मजदूरी इस देश से ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से समाप्त हो जाएगी। Bal Shram Par Nibandh बाल श्रम पर निबंध 800 words बाल मजदूरी मानवता और समाज दोनों के लिए ही अभिशाप है । बचपन किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे यादगार भाग होता है । जब भगवान ने ही इसे इतना खूबसूरत बनाया है तो हमारा क्या अधिकार है की हम इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड-छाड़ करें । एक अच्छा बचपन तो हर किसी का मौलिक अधिकार है । हर बच्चे को ये अधिकार तो होना ही चाहिए कि बचपन में वह दूसरे बच्चों के साथ खेल सके, स्कूल में शिक्षा ले सके, प्रकृति की सुन्दरता और अपने माँ-बाप के प्रेम का अनुभव कर सके । यह सब समझते और जानते हुए भी समाज का एक वर्ग अपने तुच्छ स्वार्थ और सोच की वजह से कुछ बच्चों का जीवन जहन्नुम बना देते हैं । उन्हें बाल मजदूर बना के उन से हर तरीके का मानवीय और अमानवीय कार्य कराते हैं और उनका बचपन हमेशा के लिए रौंद देते हैं । बाल मजदूरी को हम दो हिस्सों में बाँट सकते हैं । माता-पिता द्वारा कराई गयी मजदूरी और दूसरा समाज और अन्य लोगों कराई गयी मजदूरी । माँ-बाप द्वारा कराई गयी मजदूरी का ज़िक्र बड़े स्तर पर नहीं होता । जब माँ-बाप 5 से 14 साल की बच्चे पर परिवार की ज़िम्मेदारी के रूप में उन से बहुत से काम कराने लगते हैं, तो ये भी एक बाल-मजदूरी ही है । ऐसे माँ-बाप उन्हें बचपन में ही इतना बड़ा कर देते हैं की अपने जीने के सारे साधन उन्हें बचपन से ही जुटाने पड़ते हैं । जब कोई और बच्चे के प्रति कठोर होता है तो बच्चा फिर भी अपने मन को समझा लेता है, पर जब अपने ही लोग ऐसा व्यवहार करते है तो बच्चे के मानस पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है । बहुत दूर से पानी भर के लाना, रस्सियों पर नाच करवाना, सर्कस में काम करवाना, घर के साफ़-सफाई, खाना बनाने आदि का काम करवाना, खेत में काम करवाना, ये सब इसी वर्ग में आते हैं । दूसरे तरह की बाल-मजदूरी समाज द्वारा कराई जाती है । अनाथ बच्चों या गरीब बच्चों को कुछ व्यापारी लोग अपने स्वार्थ के लिए काम पर रख लेते हैं और फिर उन से तरह-तरह के काम करवाते हैं जैसे चूड़ी और कांच बनाना, कूड़ा करकट साफ़ कराना, दुकान के सब काम कराना आदी । किस-किस तरह के वीभत्स और शारीरिक व्याधि उत्पन्न करने वाले कार्य इन बच्चों से कराये जाते हैं इसकी फ़ेहरिस्त बहुत लम्बी है । भारत में बाल-मजदूर की दशा बहुत ही दयनीय है और इसका त्वरित समाधान बहुत आवश्यक है । भारत ही नहीं, ज़्यादातर विकसित देशों में बाल-मजदूरों की संख्या बहुत ज्यादा है । ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां पर विस्तृत स्तर पर गरीबी, भुखमरी तथा शिक्षा और स्कूली शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी है । हालांकि, आज़ादी के बाद से देश में बाल-मजदूरी को कम करने के लिए बहुत से नियम और क़ानून बनाए गए हैं परन्तु अभी तक वह सब अपने उद्देश्य तक नहीं पहुँच पाए है । सिर्फ नीतियाँ और कानून बाल- मजदूरी के अभिशाप को हटाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं । हमें खुद भी जागरूक होना होगा और इस जागरूकता को और भी फैलाना होगा । बाल मजदूरी रोकने के उपाय Solution of Child Labour in Hindi , जैसे — 1. निष्कर्ष — बाल मजदूरी हमारे देश के लिए एक गंभीर समस्या है अगर जल्द ही इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया तो यह पूरे देश को दीमक की तरह खोखला कर देगी. बाल श्रम एक ऐसा दिन में जहर है जोकि चंद रुपयों के लिए बेच दिया जाता है यह जहर धीरे-धीरे बच्चे के बचपन को तबाह कर देता है इसके साथ ही देश का नव निर्माण करने वाला भविष्य भी खत्म हो जाता है. हकीकत तो यह है कि लोग कानून की परवाह ही नहीं करते है इसी कारण दिन प्रतिदिन बाल श्रम बढ़ता ही जा रहा है. यह बहुत ही विडंबना का विषय है कि सिर्फ कुछ चंद रुपयों के लिए बच्चों के बचपन से खेला जा रहा है. 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